Tuesday, September 10, 2019

तेरी मेरी कहानी-२, teri meri kahani-2




couple-love, teri-meri-kahani
teri meri kahani-2




कुछ इस कदर उलझी है, ये तेरी मेरी कहानी 
लाख सुलझाओ फिर भी उलझ ही जाती है
तो फिर सुलझाओ मत, उलझन में ही बीत जाने दो, ये अपनी कहानी 

कुछ सुख दुःख का संगम है तो, 
कुछ खट्टे-मीठे का स्वाद है, ये अपनी कहानी
कभी  दिन-रात का संगम है तो कभी भोर-शाम है 
कभी दूर तो कभी पास है, ये तेरी मेरी कहानी

कभी मुस्कान समेटे, तो, कभी आंसुओं मे भीगी 
ये तेरी मेरी कहानी 
बहुत अलबेली, बहुत सुहानी 

कभी नीम सी कड़वी, कभी शहद सी मीठी 
कभी रेगिस्तान का सूखापन समेटे, कभी कलरव करती नदी की  धार 
कभी जो जेठ की  गर्मी, तो, कभी सवान की फुहार, 
ये तेरी मेरी कहानी 

कभी नदी के दो किनारे से, मिलेंगे कहाँ , कुछ पता  नहीं 
तो, कभी रेल की  पटरियों सी अलग-थलग, कभी मिलती हुई,
कभी एक दुसरे को मिलके फिर अलग-अलग सी चलती 
बहुत अजीब ये अपनी  कहानी

कभी आशा है तो कभी निराशा है
कभी मायूसी भरी रात, तो कभी उम्मींद भरी सुबह है
कभी शाम का थकान है तो कभी ताजगी जगाती चाय है
ये तेरी मेरी कहानी

कभी लाल रंग सा क्रोध लिए, कभी नीले रंग सा शांत है
कभी काली रात का सन्नाटा, तो कभी सुनहरी चादर ओढ़ी सुबह का सुकून
कभी गुलाबी रंग का प्यार तो कभी हरे रंग की  हरियाली सी
ये तेरी मेरी कहानी

कभी शोर में भी एक दुसरे की  सुन लेते है
कभी सन्नाटे में चुप्पी से सहम जाते है
कभी न बोले समझ जाते एक दूजे की
कभी बोल के एक दूजे से खफा हो जाते है

पर, जो भी है, जैसी है, कम-ज्यादा, ऊपर-नीचे,
है सादगी का चादर ओढ़े, ये अपनी कहानी
न छल है, न कपट, न ज्यादा उम्मींद,
विश्वास, ईमानदारी, त्याग, एक तपस्या है ये तेरी मेरी कहानी

एक प्यारा सा बंधन, एक पवित्र सा संगम है
एक शरमाती नयी दुल्हन, एक पुराना सा यार है
हमेशा जैसे पहला पहला प्यार है
ये अपनी कहानी

यूँ ही आशा की कलियाँ नित रोज खिले, ख़ुशी के पुष्प यूँ ही महकाये जीवन अपना
यूँ ही बाहों में एक दूजे के, हर रोज सुबह हो
हाथ में हाथ डाले शाम ढले, आँखों में आँखें डाले उम्र बीते
ये तेरी मेरी कहानी, हाँ, बस अपनी कहानी....








10 comments: